दुष्कुलीनः कुलीनो वा मर्यादां यो न लङ्घयेत् ।
धर्मापेक्षी मृदुह्हीमान् स कुलीनशताद् वरः ॥
अधम कुल में उत्पन्न हुआ हो, या उत्तम कुल में, जो मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता, धर्म की अपेक्षा रखता है, कोमल स्वभाव वाला तथा सलज है, वह सेकड़ो कुलीनों से बढ़कर है।
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