परिच्छदेन क्षत्रेण वेश्मना परिचर्यया ।
परीक्षेत कुलं राजन्भोजनाच्छादनेन च ॥
राजन! नाना प्रकार की भोग सामग्री, माता, घर, स्वागत-सत्कार के ढंग, और भोजन, तथा वस्त्र के द्वारा कुल की परीक्षा करे।
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