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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 42
अवृत्तिं विनयो हन्ति हन्त्यनर्थं पराक्रमः । हन्ति नित्यं क्षमा क्रोधमाचारो हन्त्यलक्षणम् ॥
विनय भाव अपयश का नाश करता है, पराक्रम अनर्थ को दूर करता है, क्षमा सदा ही क्रोध का नाश करती है, और सदाचार कुलक्षरण का अन्त करता है।
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