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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 41
मत्या परीक्ष्य मेधावी वुद्ध्या सम्पाद्य चासकृत्। श्रुत्वा दृष्ट्वाथ विज्ञाय प्राज्ञैमैत्रीं समाचरेत् ॥
बुद्धिमान पुरुष बुद्धि से जाँच कर, अपने अनुभव से बारम्बार उनकी योग्यता का निस्चय करें, किर दुसरो से सुनकर, और, स्वयं देखकर भलीभांति विचार करके, विद्वानों के साथ मित्रता करें।
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