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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 37
मदं स्वप्नमविज्ञानमाकारं चात्मसम्भवम् । दुष्टामात्येषु विश्रम्भं दूताच्चाकुशलादपि ॥
नशे का सेवन, निद्रा, आवश्यक बात की जानकारी न रखना, अपने नेत्र, मुख आदि का विकार, दुष्ट मन्त्रियों में विश्वास, और मूर्ख दूत पर भरोसा रखना।
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