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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 35
पापोदयफलं विद्वान् यो नारभति वर्धते | यस्तु पूर्वकृतं पापमविमृश्यानुवर्तते । अगाधपड्के दुर्मेंधा विषमे विनिपात्यते ॥
जो विद्वान पाप-रूप फल देने वाले कर्मों का आरग्भ नहीं करता, वह बढ़ता है, किन्तु जो पूर्व में किये हुए पापो का विचार करके, उन्हीं का अनुसरण करता है, वह खोटी बुद्धि वाला मनुष्य, अगाध कीचड से भरे हुए बीहड़ नरक में गिराया जाता है।
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