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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 33
सुव्याहृतानि धीराणां फलतः प्रविचिन्त्य यः । अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति ॥
जो धीर पुरुषों के वचनो के परिणाम पर विचार करके, उन्हें कार्य रूप में परिणत करता है, वह चिरकाल तक यश का भागी बना रहता है।
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