न कश्चिन्नापनयते पुमानन्यत्र भार्गवात् ।
शेषसम्प्रतिपत्तिस्तु बुद्धिमत्स्वेव तिष्ठति ॥
शुक्राचार्य के सिवा दूसरा कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है, जो नीति का उल्लंघन नहीं करता, अतः जो बीत गया, सो बीत गया। अब शेष कर्तव्य का विचार आप जैसे बुद्धिमान पुरुषो पर ही निर्भर है।
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