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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 28
पश्चादपि नरश्रेष्ठ तव तापो भविष्यति । तान्वा हतान्सुतान्वापि श्रुत्वा तदनुचिन्तय ॥
नरश्रेष्ठ! आप पाण्डवों को, अथवा अपने पुत्रों को मारे गये सुनकर, पीछे सन्ताप करेंगे। अतः इस बात का पहले ही विचार कर लीजिये।
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