ज्ञातयस्तारयन्तीह ज्ञातयो मज्जयन्ति च ।
सुवृत्तास्तारयन्तीह दुर्वृत्ता मज्जयन्ति च ॥
इस जगत में जाति-भाई ही तारते और डुबाते भी हैं। उनमें जो सदाचारी हैं, वे तो तारते है, और दुराचारी डुबा देते हैं।
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