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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 22
वृद्धेन हि त्वया कार्यं पुत्राणां तात रक्षणम् । मया चापि हितं वाच्यं विद्धि मां त्वद्धितैषिणम् ॥
नरेश्वर! ऐसा करने से आपको इस संसार में यश प्राप्त होगा। तात! आप बुद्ध हैं, इसलिये आपको अपने पुत्रो पर शासन करना चाहिये।
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