दीयन्तां ग्रामकाः के चित्तेषां वृत्त्यर्थमीश्वर ।
एवं लोके यशःप्राप्तो भविष्यत्सि नराधिप ॥
राजन! आप समर्थ हैं, वीर पाण्डवो पर कृपा कीजिये, और उनकी जीविका के लिये कुछ गाँव दे दीजिये।
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