विदुर उवाच।
अप्राप्तकालं वचनं बृहस्पतिरपि ब्रुवन्।
लभते बुद्ध्यवज्ञानमवमानं च भारत ॥
विदुरजी बोले - भारत! समय के विपरीत यदि बृहस्पति भी कुछ बोले, तो उनका अपमान ही होगा, और उनकी बुद्धि को भी अवज्ञा ही होगी।
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