यो ज्ञातिमनुगृह्णाति दरिद्रं दीनमातुरम् ।
सपुत्रपशुभिर्वृद्धिं यशश्चाव्ययमश्नुते ॥
जो अपने कुटुम्बी, दरिद्र, दीन, तथा रोगी पर अनुगरह करता है, वह पुत्र और पशुओ से समृद्ध होता है, और अनन्त कल्याण को अनुभव करता है।
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