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विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 10
विदुर उवाच । स्वभावगुणसम्पन्नो न जातु विनयान्वितः । सुसूक्ष्ममपि भूतानामुपमर्दं प्रयोक्ष्यते ॥
विदुरजी बोले - जो अधिक गुणों से सम्पन्न और विनयी है, वह प्राणियों का तनिक भी संहार होते देख, उसकी कभी उपेक्षा नहीं कर सकता।
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