मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 7 • श्लोक 1
धृतराष्ट्र उवाच। अनीश्वरोऽयं पुरुषो भवाभवे सूत्रप्रोता दारुमयीव योषा। धात्रा हि दिष्टस्य वशे किलायं तस्माद्वद त्वं श्रवणे घृतोऽहम् ॥
धृतराष्ट्र ने कहा - विदुर! यह पुरुष ऐश्वर्य की प्राप्ति, और नाश में स्वतंत्र नहीं है। ब्रह्मा ने धागे से बँधी हुई कठपुतली की भाँति, इसे प्रारब्ध के अधीन कर रखा है। इसलिये तुम कहते चलो, मैं सुनने के लिये धैर्य धारण किये बैठा हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें