धृतराष्ट्र ने कहा - विदुर! यह पुरुष ऐश्वर्य की प्राप्ति, और नाश में स्वतंत्र नहीं है। ब्रह्मा ने धागे से बँधी हुई कठपुतली की भाँति, इसे प्रारब्ध के अधीन कर रखा है। इसलिये तुम कहते चलो, मैं सुनने के लिये धैर्य धारण किये बैठा हूँ।
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