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विदुर नीति • अध्याय 6 • श्लोक 47
तं द्रक्ष्यसि परिभ्रष्टं तस्मात्त्वं नचिरादिव । ऐश्वर्यमदसंमूढं बलिं लोकत्रयादिव ॥
इसलिये आप शीघ्र ही, उस ऐश्रर्यमद से मृढ़ दुर्योधन को, त्रिभुवन के साम्राज्य से गिरे हुए बालि की भांति, इस राज्य से भ्रष्ट होते देखियेगा।
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