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विदुर नीति • अध्याय 6 • श्लोक 4
चिकित्सकः शक्य कर्तावकीर्णी स्तेनः क्रूरो मद्यपो भ्रूणहा च । सेनाजीवी श्रुतिविक्रायकश् च भृशं प्रियोऽप्यतिथिर्नोदकार्हः ॥
वैद्य, चीर-फाड़ करने वाला (जर्राह), ब्रह्मचर्य से भ्रष्ट, चोर, क्रूर शराबी, गर्भहत्यारा, सेनाजीवी, और वेद विक्रेता, ये यद्यपि पैर धोने के योग्य नहीं हैं, तथापि यदि अतिथि होकर आवें तो विशेष प्रिय, यानी आदर के योग्य है।
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