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विदुर नीति • अध्याय 6 • श्लोक 39
असंविभागी दुष्टात्मा कृतघ्नो निरपत्रपः । तादृङ्नराधमो लोके वर्जनीयो नराधिप ॥
राजन! जो अपने आश्रितो मे धन का ठीक-ठाक बॅटवारा नहीं करता, तथा जो दुष्ट, कृत्घन और निर्लज्ज है, ऐसा राजा इस लोक में त्याग देने योग्य है।
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