जिसके प्रसन्न होने का कोई फल नहीं, तथा ज़िसका क्रोध भी व्यर्थ होता, ऐसे राजा को प्रजा, उसी भाति नहीं चाहती, जैसे स्त्री नपुंसक पति को।
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