निरर्थं कलहं प्राज्ञो वर्जयेन्मूढ सेवितम् ।
कीर्तिं च लभते लोके न चानर्थेन युज्यते ॥
निरर्थक कलह करना मूर्खो का काम है, बुद्धिमान पुरुष को इसका त्याग करना चाहिये, ऐसा करने से उसे लोक में बश मिलता है, और अनर्थ का सामना नहीं करना पड़ता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।