दैवतेषु च यत्नेन राजसु ब्राह्मणेषु च ।
नियन्तव्यः सदा क्रोधो वृद्धबालातुरेषु च ॥
देवता, ब्राह्मण, राजा, बुद्ध, बालक, और रोगी पर होने वाले क्रोध को प्रयत्न पूर्वक सदा रोकना चाहिये।
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