यस्योदकं मधुपर्कं च गां च न मन्त्रवित्प्रतिगृह्णाति गेहे ।
लोभाद्भयादर्थकार्पण्यतो वा तस्यानर्थं जीवितमाहुरार्याः ॥
वेदवेत्ता बाह्मण, जिसके घर दाता के लोभ, भय, या कंजूसी के कारण, जल मधुपर्क, और गौ को नहीं स्त्वाकार करता, श्रेष्ठ पुरुष, उस गृहस्थ का जीवन व्यर्थ वताया है।
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