अप्रशस्तानि कर्माणि यो मोहादनुतिष्ठति ।
स तेषां विपरिभ्रंशे भ्रश्यते जीवितादपि ॥
जो मोहवश बुरे कर्म करता है, वह उन कार्यो का विपरीत परिणाम होने से, अपने जीवन से भी हाथ धो बैठता है।
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