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विदुर नीति • अध्याय 6 • श्लोक 20
अमात्ये ह्यर्थलिप्सा च मन्त्ररक्षणमेव च ॥
राजा अच्छी तरह परीक्षा किये बिना, किसी को अपना मन्त्री न बनावे, क्योंकि धन की प्राप्ति, और मन्त्र की रक्षा का भार, मन्त्री पर ही रहता है।
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