धीर पुरुष को चाहिये, जब कोई साधु पुरुष अतिथि के रूप में घर पर आवे, तो पहले आसन देकर, जल लाकर उसके चरण पखारे, फिर उनका कुशल पूछकर अपनी स्थिति बतावे, तदनन्तर आवश्यकता समझकर अन्न भोजन करवाये।
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