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विदुर नीति • अध्याय 6 • श्लोक 14
नित्यं सन्तः कुले जाताः पावकोपम तेजसः । क्षमावन्तो निराकाराः काष्ठेऽग्निरिव शेरते ॥
अच्छे कुल में उत्पन्न, अग्नि के समान तेजस्वी, क्षमाशील, और विकारशुन्य पुरुष, सदा काष्ठ में अग्नि की भाँति शान्तभाव से स्थित रहते हैं।
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