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विदुर नीति • अध्याय 6 • श्लोक 13
अद्भ्योऽग्निर्ब्रह्मतः क्षत्रमश्मनो लोहमुत्थितम् । तेषां सर्वत्रगं तेजः स्वासु योनिषु शाम्यति ॥
सेवकों द्वारा वाणिज्य-व्यापार, और पुत्रो के द्वारा बाह्मणो की सेवा करे। जल से अग्नि, ब्राह्मण से क्षत्रिय, और पत्थर से लोहा पैदा हुआ है। इनका तेज सर्वत्र व्याप्त होने पर भी, अपने उत्पत्तिस्थान मे शान्त हो जाता है।
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