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विदुर नीति • अध्याय 6 • श्लोक 12
पितुरन्तःपुरं दद्यान्मातुर्दद्यान्महानसम् । गोषु चात्मसमं दद्यात्स्वयमेव कृषिं व्रजेत् । भृत्यैर्वणिज्याचारं च पुत्रैः सेवेत ब्राह्मणान् ॥
अन्तः पुर की रक्षा का कार्य, पिता को सौंप दे, रसोई-घर का प्रबंध माता के हाथों में दे दे, गौओं की सेवा में, अपने समान व्यक्ति को नियुक्त करे, और कृषि का कार्य स्वयं करे।
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