सर्पश्चाग्निश्च सिंहश्च कुलपुत्रश्च भारत ।
नावज्ञेया मनुष्येण सर्वे ते ह्यतितेजसः ॥
भारत! मनुष्य को चाहिये, कि वह सर्प, अग्नि, सिंह, और अपने कुल में उत्पन्न व्यक्तिव का अनादर न करे, क्योंकि ये सभी बड़े तेजस्वी होते हैं।
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