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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 57
स्त्रीषु राजसु सर्पेषु स्वाध्याये शत्रुसेविषु । भोगे चायुषि विश्वासं कः प्राज्ञः कर्तुमर्हति ॥
ऐसा कौन बुद्धिमान् होगा, जो स्त्री, राजा, साँप, पढ़े हुए पाठ, सामर्थ्यशाली व्यक्ति, शत्रु भोग, और आयुष्य पर पूर्ण विश्वास कर सकता हो।
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