जो मनुष्य का बहुत बड़ा अपकार कर सकता है, उस पुरुष के साथ बैर ठानकर, इस विश्वास पर निश्चिन्त न हो जाय कि मैं उससे दूर हूँ, (बह मेरा कुछ नहीं कर सकता)।
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