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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 55
येन त्वेतानि सर्वाणि सङ्गृहीतानि भारत । यद्बलानां बलं श्रेष्ठं तत्प्रज्ञा बलमुच्यते ॥
भारत! जिसमे इन सभी बलों का संगह हो जाता है, तब जो सब बलों में श्रेष्ठ बल है, वह पाँचवा, बुद्धि का बल कहलाता है।
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