यत्त्वस्य सहजं राजन्पितृपैतामहं बलम् ।
अभिजात बलं नाम तच्चतुर्थं बलं स्मृतम् ॥
राजन्! जो बाप दादो से प्राप्त हुआ, मनुष्य का स्वाभाविक बल, (कुटम्ब का बल) है, वह अभिजात नामक चौथा बल है।
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