बलं पञ्च विधं नित्यं पुरुषाणां निबोध मे ।
यत्तु बाहुबलं नाम कनिष्ठं बलमुच्यते ॥
आपका कल्याण हो, मनुष्य में सदा पाँच प्रकार का बल होता है, उसे सुनिये। जो बहुबल नामक बल है, वह कनिष्ठ बल कहलाता है।
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