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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 49
यस्यात्मा विरतः पापात्कल्याणे च निवेशितः । तेन सर्वमिदं बुद्धं प्रकृतिर्विकृतिर्श्च या ॥
जिसकी बुद्धि पाप से हटाकर कल्याण में लगा दी गयी है, उसने संसार में जो भी प्रकृति और विकृति हैं, उन सबको जान लिया है।
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