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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 46
न स्याद्वनमृते व्याघ्रान्व्याघ्रा न स्युरृते वनम् । वनं हि रक्ष्यते व्याघ्रैर्व्याघ्रान्रक्षति काननम् ॥
व्याघ्रों के बिना वन की रक्षा नहीं हो सकती, तथा वन के बिना व्याघ्र नहीं रह सकते। क्योंकि व्याघ्र वन की रक्षा करते हैं, और वन व्याघों की।
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