धार्तराष्ट्रा वनं राजन्व्याघ्राः पाण्डुसुता मताः ।
मा वनं छिन्धि स व्याघ्रं मा व्याघ्रान्नीनशो वनात् ॥
राजन्! आपके पुत्र वन के समान हैं, और पाण्डव उसमें रहने वाले व्याघ्र हैं। आप व्याघ्रों सहित समस्त वन को नष्ट न कीजिये, तथा बन से उन व्याघ्रो को दूर न भगाइये।
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