इन्द्र के समान पराक्रमी महाराज! आकाश मे तिरछा उदित हुआ धूमकेतु, जैसे सारे संसार में अशान्ति, और उपद्रव खड़ी कर देता है, उसी तरह भीष्म, आप, द्रोणाचार्य, और राजा युधिष्टिर का बढ़ा हुआ कोप, इस संसार का संहार कर सकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।