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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 39
उत्पाद्य पुत्राननृणांश्च कृत्वा वृत्तिं च तेभ्योऽनुविधाय कां चित् । स्थाने कुमारीः प्रतिपाद्य सर्वा अरण्यसंस्थो मुनिवद्बुभूषेत् ॥
पुत्रो को उत्पन्न कर, उन्हें ऋण के भार से मुक्त करके, उनके लिये किसी जीविका का प्रबन्ध कर दे, फिर कन्याओ का योग्य वर के साथ विवाह कर देने के पश्चात्, वन मे मुनिवृत्ति से रहने की इच्छा करे।
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