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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 38
सहायबन्धना ह्यर्थाः सहायाश्चार्थबन्धनाः । अन्योन्यबन्धनावेतौ विनान्योन्यं न सिध्यतः ॥
धन की प्राप्ति, सहायक की अपेक्षा रखती है, और सहायक धन की अपेक्षा रखते हैं। ये दोनों एक-दूसरे के आश्रित हैं, परस्पर के सहयोग बिना इनकी सिद्धि नहीं होती।
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