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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 36
कदर्यमाक्रोशकमश्रुतं च वराक सम्भूतममान्य मानिनम् । निष्ठूरिणं कृतवैरं कृतघ्नम् एतान्भृतार्तोऽपि न जातु याचेत् ॥
बहुत दुखी होने पर भी कृपण, गाली बकने वाले, मूर्ख, जंगल में रहने वाले, धूर्त, नीच सेवी, निर्दयी, वैर बाँधने वाले, और कृतन्न से, कभी सहायता की याचना नहीं करनी चाहिये।
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