अकर्म शीलं च महाशनं च लोकद्विष्टं बहु मायं नृशंसम् ।
अदेशकालज्ञमनिष्ट वेषम् एतान्गृहे न प्रतिवासयीत ॥
अकर्मण्य, बहुत खाने वाले, सब लोगो से वेर करने वाले, अधिक मायावी, क्रूर, देश-काल का ज्ञान न रखने वाले, और निन्दित वेष धारण करने वाले मनुष्य को, कभी अपने घर में न ठहरने दे।
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