घृणी राजा पुंश्चली राजभृत्यः पुत्रो भ्राता विधवा बाल पुत्रा ।
सेना जीवी चोद्धृत भक्त एव व्यवहारे वै वर्जनीयाः स्युरेते ॥
अधिक दयालु राजा, व्यभिचारिणी स्त्री, राजकर्मचारी, पुत्र, भाई, छोटें बच्चों बाली विधवा, सैनिक, और जिसका अधिकार छीन लिया गया हो, वह इन सबके साथ लेन-देन का व्यवहार न करे।
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