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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 29
न निह्नवं सत्र गतस्य गच्छेत् संसृष्ट मन्त्रस्य कुसङ्गतस्य । न च ब्रूयान्नाश्वसामि त्वयीति स कारणं व्यपदेशं तु कुर्यात् ॥
दुष्ट सहायको वाला राजा, जब बहुत लोगों के साथ मन्त्रणा समिति में बैठकर सलाह ले रहा हो, उस समय उसकी बात का खण्डन न करे। मैं तुम पर विश्वास नहीं करता ऐसा भी न कहे, अपितु, कोई युक्तिसंगत बहाना बना कर वहाँ से हट जाय।
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