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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 28
न विश्वासाज्जातु परस्य गेहं गच्छेन्नरश्चेतयानो विकाले । न चत्वरे निशि तिष्ठेन्निगूढो न राजन्यां योषितं प्रार्थयीत ॥
सावधान मनुष्य विश्वास करके, असमय में कभी किसी दुसरे अविश्वस्त मनुष्य के घर न जाय, रात मे छिपकर चौराहे पर न खड़ा हो, और राजा जिस स्त्री को ग्रहण करना चाहता हो, उसे प्राप्त करने का यल्न न करें।
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