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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 27
अस्तब्धमक्लीबमदीर्घसूत्रं सानुक्रोशं श्लक्ष्णमहार्यमन्यैः। अरोग जातीयमुदारवाक्यं दूतं वदन्त्यष्ट गुणोपपन्नम् ॥
अहंकार रहित, कायरता शून्य, शीष्र काम पूरा करने वाला, दयालु, शुद्ध हृदय, दूसरो के बहकावे में न आने वाला, नीरीग, और उदार बचन वाला, इन आठ गुणो से युक्त मनुष्य को, दूत बनाने योग्य बताया गया हैं।
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