कृत्यानि पूर्वं परिसङ्ख्याय सर्वाण्य् आयव्ययावनुरूपां च वृत्तिम् ।
सङ्गृह्णीयादनुरूपान्सहायान् सहायसाध्यानि हि दुष्कराणि ॥
पहले कर्तव्य, आय-व्यय, और उचित वेतन, आदि का निश्चय करके, फिर सुर्योग्य सहायका का संग्रह करे। क्यांकि कठिन से कठिन कार्य भी सहायको द्वारा साध्य होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।