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विदुर नीति • अध्याय 5 • श्लोक 21
काकैरिमांश्चित्रबर्हान्मयूरान् पराजैष्ठाः पाण्डवान्धार्तराष्ट्रैः । हित्वा सिंहान्क्रोष्टु कान्गूहमानः प्राप्ते काले शोचिता त्वं नरेन्द्र ॥
नरेन्द्र! आप कौओं के समान, अपने पुत्र के ह्वारा विचित्र पंख वाले मोरों के सदश, पाण्डवों को पराजित करने का प्रयत्न कर रहे हैं, सिंहो को छोडकर सियारों की रक्षा कर रहे हैं, समय आने पर आप को इसके लिये पश्चाताप करना पड़ेगा।
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