तानेविन्द्रस्य हि धनुरनाम्यं नमतोऽब्रवीत् ।
अथो मरीचिनः पादाननाम्यान्नमतस्तथा ॥
न झुकाये जा सकने वाले, वर्षा कालीन इन्द्र थनुष को झुकाना चाहता है, पकड़ मे न आने वाली, सूर्य की किरणो को पकड़ने का प्रयास करता है।
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